दे सलामी इस तिरंगे को
जिस से तेरी शान हैं,
सर हमेशा ऊँचा रखना इसका
जब तक दिल में जान हैं..!!
किसी को क्या बताये की कितने मजबूर हू ,
चाहा था सिर्फ एक तुमको और तुमसे ही दूर हू .
काश कोई हम पर भी इतना प्यार जताती,
पीछे से आकर वो हमारी आँखों को छुपाती,
हम पूछते की कौन हो आप …??
और वो मुस्करा कर खुदको हमारी जान बताती.
उसको चाहा पर इजहार करना नही आया,
कट गयी उम्र हमें प्यार करने नही आया,
उसने कुछ माँगा भी तो मागी रजाई,
और हमे इंकार करना नही आया....
बस एक चुप सी लगी है, नहीं उदास नहीं!कहीं पे सांस रुकी है!नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!कोई अनोखी नहीं, ऐसी ज़िन्दगी लेकिन!खूब न हो, मिली जो खूब मिली है!नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!सहर भी ये रात भी, दोपहर भी मिली लेकिन!हमीने शाम चुनी, हमीने शाम चुनी है!नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!वो दासतां जो, हमने कही भी, हमने लिखी!आज वो खुद से सुनी है!नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!
मिलने का वादा कर गयी थी,
वापस लौट आउंगी ये कहकर गयी थी,
आई है अब वो जनाज़े पे मेरे,
वादा वो अपना निभाने चली थी!!