बीवियाँ आती हैं हीर की तरहअच्छी लगती हैं खीर की तरहफिर चुभती हैं तीर की तरहहालत कर देती हैं फ़कीर की तरहहैप्पी करवा चौथ
कोई मिला नहीं तुम जैसा आज तक,पर ये सितम अलग है की मिले तुम भी नही
ना गिन कर दिया
ना तोल कर दिया,
जब भी दिया
शेरोंवाली माँ ने,
दिल खोल कर दिया…
जय शेरोंवाली माँ
हुस्न वाले जब तोड़ते हैं दिल किसी का,बड़ी सादगी से कहते है मजबूर थे हम.