ज़िंदगी तेरे बिना अब कटती नहीं है…
तेरी याद मेरे दिल से मिटती नही…
तुम बसे हो मेरी निगाहो में…
आँखो से तेरी सूरत हटती नही!!
कदम डग मगा गये युही रास्ते से
वरना सम्भलना हम भी जानते थे,
ठोकर लगी तोभी उस पत्थर से
जिसे हम अपना खुदा मानते थे।।
चाँद तारो से रात जगमगाने लगी,
फूलों की खुश्बू से दुनिया महकने लगी,
सो जाइये रात हो गयी है काफ़ी,
निंदिया रानी भी आपको देखने है आने लगी
Yuhi aankhon se ansu bahte nahi,
Kisi aur ko hum apna kahte nahi,
Ek tum hi ho jo ruk se gaye ho zindagi mein,
Varna rukne ke liye hum kisi ko kahte nahi…
समझदार बनने की कोशिश में शरारत
भी खो बैठे
अब इस समझदारी में सबको साजिश नजर
आती है…