पत्नि सो रही थी, उसके पैरो के पास एक नागिन कुण्डली लगा के बैठी थी।
पति धीरे से बोला : डस ले…. डस ले….
नागिन बोली:
कमीने!
चरण स्पर्श करने आई हूँ।
गुरु हैं हमारी।
Ye mout bi badi ajeeb chiz hei yaro…
Sala Ek Din Marne ke liye Puri Zindgi Jini padTi hey…
आज हम भी एक नेक काम कर आए,
दिल की वसीयत किसी के नाम कर आए,
प्यार हैं उनसे ये जानते हैं वो……,
मज़बूरी थी जो झुकी नज़रों से इनकार कर आए
पति-तुम्हारी रोज-रोज की नई फरमाइशों से परेशान होकर मैं आत्महत्या कर लूंगा।
पत्नी-आप भी न रुला के ही मानोगे
चलो एक अच्छी सी सफेद साड़ी दिला दो बस. आपकी तेरहवीं पर पहनूंगी।
आसमां पे ठिकाने किसी के नहीं होते !
जो ज़मीं के नहीं होते वो कहीं के नहीं होते !
सुप्रभात ॥