ठोकर खा कर भी अगर ना संभले तो मुसाफ़िर का नसीब...वरना राहों के पत्थर तो....अपना फ़र्ज़ अदा करते ही हैं.....
आकाश से ऊँचा कौन – पिता
धरती से बड़ा कौन – माता
जादू हैं उसकी हर एक बात में,
याद बहुत आती है दिन और रात में,
कल जब देखा था मेने सपना रात में,
तब भी उसका ही हाथ था मेरे हाथ में
सुना है, खुदा के दरबार से कुछ फ़रिश्ते फरार हो गए,
कुछ तो वापस चले गए, और कुछ हमारे यार हो गए
Humne to khud se inteqam lia ,
Tumne kya soch kar humse mohabbat ki?