बड़ी बेवफा हो जाती है ग़ालिब ये घडी भी सर्दियों में,5 मिनट और सोने की सोचो तो, 30 मिनट आगे बढ़ जाती है...
इंसान सबसे ज्यादा तब खुश होता है, जब रेलवे फाटक बंद हो रहा हो और उसके पहले वो अपनी गाड़ी तुरंत-फुरंत निकाल ले... कसम से इसके बाद ओलिंपिक रेस जीतने वाली फीलिंग होती है।
चुनाव को लेकर चार लाइन लिखी, जो बहुत जरूरी भी है..
तुम मेरी बात पे चेहरा उदास मत करना,
इधर की सुनके, उधर जाके बात मत करना,
चुनाव चार दिन के है, ताल्लुक़ जिन्दगी भर के..
किसी भी दोस्त से रिश्ता खराब मत करना।
Na Papa ki maar se,Na Dosto ki fatkaar se,Na ladki ke inkar se,Na chaplo ki bauchhar se,Aashiq sudhrenge to sirf RAKHI ke tyohaar se...
इस गर्मी का आलम बस ...इतना समझ ले ग़ालिब....कपडे धोते ही सुख जाते है ।और पहनते ही गीले हो जाते है ।।