Phooloan se kya dosti karte ho,Phool to murjha jaate hain.Aggar dosti karni hai to kaanton se karo,Kyun ki woh chubh kar bhi yaad aatein hain.
हर रिश्ते में मिलावट देखी, कच्चे रंगों की सजावट देखी,लेकिन सालों साल देखा है माँ को,उसके चेहरे पे न थकावट देखी, न ममता में मिलावट देखी...
पलकों से रास्ते के काटे हटा देंगे,
फूलों को क्या हम अपना दिल बिछा देंगे।
टूटने ना देंगे अपनी दोस्ती को कभी,
बदले में हम खुद को मिटा लेंगे।।
उसके साथ रहते रहते हमे चाहत सी हो गयी,उससे बात करते करते हमे आदत सी हो गयी,एक पल भी न मिले तो न जाने बेचैनी सी रहती है,दोस्ती निभाते निभाते हमे मोहब्बत सी हो गयी!