तेरे आगोश में मिल जाये पनाहहम इतने खुश नसीब कहाँ
तेरे आगोश में मिल जाये पनाह
हम इतने खुश नसीब कहाँ
"एक दिन किसी मोड़ पे,अपनी मोह्हबत में लिपटा पाओगी,जो आज तुम ठुकरा रही,उसी लिबास में वापस आओगी l"
Khud Me Hum Kuch Is Tarah Kho Jate Hai,
Sonchte Hai Aapko To Aapke Hi Ho Jaate Hai,
Nind Nahi Aati Raton Me Par,
Aapko Khwab Me Dekhne Ke Liye So Jate Hai
फिर वही फ़साना अफ़साना सुनाती हो
दिल के पास हूँ कह कर दिल जलती हो
बेक़रार है आतिश इ नज़र से मिलने को
तो फिर क्यों नहीं प्यार जताती हो…!!
अपने इन् हाथों की लकीरों
को क्या देखता हो?
किस्मत तो उनकी भी होती है
जिनके हाथ नहीं होते…
तकदीर के हाथों खुद को में जोड़ना नहीं चाहता,
मेरे दो हाथो का होसला में तोडना नहीं चाहता,
मौसम की तरह बदल जाती ये हाथो की लकीरें,
बंद मुट्ठी मेरी हरगिज़ मैं खोलना नहीं चाहता।