अपने आप को मारने के झंझट में न पड़ेंक्योंकि आदमी जब तक अपने आप को मारता हैतब तक बहुत देर हो चुकी होती है
अपने आप को मारने के झंझट में न पड़ें
क्योंकि आदमी जब तक अपने आप को मारता है
तब तक बहुत देर हो चुकी होती है
पैसों से इन्सान सब कुछ नहीं खरीद सकताजैसे मरे हुए को जिंदा करना
पैसों से इन्सान सब कुछ नहीं खरीद सकता
जैसे मरे हुए को जिंदा करना
"बड़ा Business बड़े Product से बनता है "
डर कहीं और नहीं बस आपके मगज(दिमाग) में होता है।