मोहब्बत भरी नजरों में ख्वाब मिलेंगे
कहीं कांटे तो कहीं गुलाब मिलेंगे
मेरे दिल की किताब को पढ़ के तो देखो
कहीं आपकी याद तो कहीं खुद आप मिलेंगे
"खुद से गुफ्तगू अक्सर शायर ही करते हैं।"
जबसे आपकी सूरत दिल में उतर रही हैं,
ऐसा लगता हैं जिन्दगी बड़े चैन से गुजर रही हैं.
उसकी मोहब्बत लाख छुपाई ज़माने से मैंने,
मगर आँखों में तेरे अक्स को छुपा न सका।
” मोहब्बत ” करने वाले आशिक कम
ना होंगे पर तेरी महफिल मे हम ना होंगे
तुम दुश्मनों की बात करते हो
हमें तो अपने देख के जल जाते हैं....!