हजारो महफिल हैं लाखो के मेले हैं,
पर जहाँ तू नहीं वहाँ हम बिल्कुल अकेले हैं !
"वो ग़ज़ल लिखते है और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है और हम नासमझ खुद पे समझते है।"
एक अजीब सी बेताबी है तेरे बिना,
रह भी लेते है और रहा भी नही जाता।
तुम आये तो लगा हर खुशी आ गई,
यू लगा जैसे ज़िन्दगी आ गई…
था जिस घड़ी का मुझे कब से इंतज़ार
अचानक वो मेरे करीब आ गई …
कुछ जख्म सदियों बाद तक भी ताजा रहते हैं
वक़्त के पास भी हर मर्ज़ का इलाज नहीं होता
तेरे अहसास की खुशबू रग रग में समाई है,
अब तू ही बता क्या इसकी भी कोई दवाई है।