इश्क है या कुछ और ये तो मुझे पता नहीं,
मगर मेरे दिल को जो सुकून तेरे होने से है,
वो किसी और से नहीं !
जब मैं डूबा तो समुन्दर को भी हैरत हुयी,
अजीब शख्स है किसी को पुकारता भी नहीं।
लिख दूँ तो लफज़ तुम हो,
सोच लूँ तो ख्याल तुम हो,
माँग लूँ तो मन्नत तुम हो,
और चाह लूँ तो जन्नत तुम हो,
कुछ ना बचा मेरे इन, दो खाली हाथों में,
एक हाथ से किस्मत रूठ गई,
तो दूसरे हाथ से मोहब्बत छूट गई।
महफ़िल मुझे सिखाने वाला था खुस कैसे रहते हैं।
अकेलापन ने मुझे महफ़िल से बात करने नही दिया।
तेरे अहसास की खुशबू रग रग में समाई है,
अब तू ही बता क्या इसकी भी कोई दवाई है।