“तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है !
तेरी हर मुस्कान से मिली मुझे खुशी है !
मुस्कुराते रहना इसी तरह हमेशा !
क्योंकि तेरी इस मुस्कान में मेरी जान बसी है।
अपने हसीन होंठों को परदे में छुपा लिया करो,
हम बड़े गुस्ताख हैं नज़रों से चूम लिया करते हैं
रो पड़ा है आसमा भी मेरी वफ़ा को देख कर,
देख तेरी बेवफाई की बात बदलो तक जा पहुंची|
गुलाब हैरान है ये कैसा मंज़र है,
एक शख़्स में खुशबु मुझसे बेहतर है..!
इश्क के चांद को अपनी पनाह में रहने
दो लबों को ना खोलो आंखों को कुछ कहने दो
कुछ जख्म सदियों बाद तक भी ताजा रहते हैं
वक़्त के पास भी हर मर्ज़ का इलाज नहीं होता