लगता है तुम्हे नजर में बसा लूं,
औरों की नजरों से तुम्हे बचा लूं,
कहीं चुरा ना ले तुम्हे मुझसे कोई,
आ तुझे मैं अपनी धड़कन में छिपा लूं..
“लोगों की सोच से जो डरते हो तुम,
इसी लिए खुद की सोच में खुद गिरते हो तुम।
ये इश्क़ का हफ्ता नही था जनाब,,,
ये इश्क़ ही हफ्ते भर का था,,,,
खुशियों से भरा जैसे कल हो कोई
तू जैसे हर मुश्किल का हल हो कोई
तुझे पढ़कर मुस्कुराने लगता हूँ मैं
मोहब्बत की जैसे तू ग़ज़ल हो कोई
लम्हे जुदाई को बेकरार करते हैं,
हालत मेरे मुझे लाचार करते हैं,
आँखे मेरी पढ़ लो कभी,
हम खुद कैसे कहे की आपसे प्यार करते हैं
एक दूसरे से मोहब्बत कुछ ऐसी हो गयी है,
दिल तो दो है मगर धड़कन एक हों गयी है..!!