कोइ कितना भी कड़वा बोले
अपने आप को शांत रखे..!
क्युकी धूप कितनी भी तेज क्यों ना
हो समुद्र को नहीं सूखा सकती है..
इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम न सोए रात थक कर सो गई
कमाल है ना...
आँखे तालाब नहीं, फिर भी भर आती हैं
दिल कांच नहीं, फिर भी टूट जाता है
और इंसान मौसम नहीं, फिर भी
बदल जाता है..!!
अब तो शायद ही मुझसे मोहब्बत करे कोई,
मेरी आँखों में तुम साफ नजर आते हो !
रहे न कुछ मलाल बड़ी शिद्दत से कीजिए…
नफ़रत भी कीजिए ज़रा मुहब्बत से कीजिए..!!
प्यार का पता नहीं जिंदगी हो तुम..
जान का पता नहीं दिल की धड़कन हो तुम।