कमाल है ना...
आँखे तालाब नहीं, फिर भी भर आती हैं
दिल कांच नहीं, फिर भी टूट जाता है
और इंसान मौसम नहीं, फिर भी
बदल जाता है..!!
तूने रुख से नक़ाब क्या उठाया,
कम्बखत दिल मुँह को होने लगा,
शर्मा कर , सितारे हैं छुपने लगे,
महताब बादलों से जो निकलने लगा
किसी ने मुझे कहा की तुम हर रोज,
सुबह सुप्रभात करके सबको याद करते हो,
तो क्या वो भी तुम्हे याद करते है मेंने कहा,
मुझे रिश्ता निभाना है मुकाबला नहीं करना!
Good Morning
Ek raat dhadkan ne aankh se pucha.
tu dosti me itni kyu khoi hai?
Tab dil se awaj aayi doston ne hi
saari khusiyan di hai,
warna pyar karke toh ankh royi hai..
बिन बात के ही रूठने की आदत है,
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है,आप खुश रहें, मेरा क्या है..मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।