ख़ुद को भूला हूँ उस को भूला हूँउम्र भर की यही कमाई है ...
"अंजुम तुम्हारा शहर जिधर है उसी तरफ,एक रेल जा रही थी,कि तुम याद आ गए"
"होती हो ओझल नज़रों से,
ढूंढ़ती है आँखे तुम्हें,
जैसे खोजता कोई शहर-शहर,
ऑक्सीजन सैलेंडर है l"
काश कोई हम पर भी अपना प्यार जताती,
पीछे से आकर हमारी आंखों को छुपाती,
हम पूछते की तुम कौन हो,
और तुम खुद को हस कर हमारी जान बताती..