ख़ुद को भूला हूँ उस को भूला हूँउम्र भर की यही कमाई है ...
ज़िंदगी चाहे
जितना उलझायेगी,
तुम थामे रहना
डोर मजबूती से,
मैं दूसरा छोर
ढूंढ लाऊँगा l
कई कारवाँ हो लिए उसकी तरफ,अब शायद मैं उसकी नज़र में नहीं..
काश कोई हम पर भी अपना प्यार जताती,
पीछे से आकर हमारी आंखों को छुपाती,
हम पूछते की तुम कौन हो,
और तुम खुद को हस कर हमारी जान बताती..
Pyar Bhari shayari