सादगी इतनी भी नहीं है अब बाकी मुझमें,
कि तू वक़्त गुज़ारे और मैं मोहब्बत समझूं।
प्रेम सबकुछ सह लेता है,पर उपेक्षा नहीं सह सकता ।
बिना दोस्त बने,
कोई अच्छा प्रेमी
नहीं हो सकता,
कभी देखा है तुमने,
रेत में गुलाब,
खिलते हुए l
एक आवाज़, दिल को राहत दे गई,जल्दी बीते ये दिन चाहत दे गई l
कभी गुस्से में मुझे वो बहुत डाँटती है,ऐसा प्यार वो सबको नहीं बाँटती है l
सज रही हैं खुशियों की महफ़िल,
सज रहे समाज हैं हो ये खुशहाल.
सलामत रहे आपकी पूरी जिंदगी,
मुबारक हो नया साल।