किसी ने पूछा मुझसे, उसको इतना प्यार कैसे दे पाते हो,
मुस्कुरा कर मैंने भी कह दिया, डूबना पड़ता है समंदर में बूँद की तरह।
तेरी मोहब्बत भी किराये की घर की तरह हो गया,
जितना भी हमने सजाया पर वो अपना न हो पाया।
मौत तो नाम से ही बदनाम है,
वरना तकलीफ तो जिन्दगी ही देती है।
दिल की किताब में गुलाब उनका था;
रात की नींदों में ख्वाब उनका था;
कितना प्यार करते हो जब हमने पूछा;
मर जायेंगे तुम्हारे बिना यह जवाब उनका था।
उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है,
अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती..!!