मेरे राज के हमराज हो तुम,
मेरे लिए मुझसे ज्यादा खास हो तुम
⇒⇒ कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता,
तुम न होते न सही… ज़िक्र तुम्हारा होता!!