जब तुम्हारी जिदंगी में ज्यादा धूप होगी
मैं बन के छांव आ जाऊंगा...
अपनी जान के लिए |
अपने जान को जान से जुदा कर दिया |
मोहबत कुछ इस कदर किया |
सांस चल रही है हम ने जीना छोड़ दिया |
कुछ लोग पसंद करने लगे हैं अल्फाज मेरे,
मतलब मोहब्बत में बरबाद और भी हुए हैं।
इश्क़ में अक्सर ऐसा होता है
जो सबसे ज़्यादा प्यार करता है वही रोता है
“प्यार भी कितना अजीब होता है न,
वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून
उसी के पास मिलता है।”
प्यार मोहब्बत आशिकी ये बस अल्फाज थे,
मगर जब तुम मिले तब इन अल्फाजो को मायने मिले..!!