तन्हाई में मुश्कुराना भी इश्क है,और इस बात को छुपाना भी इश्क है।
बड़ी मासूम सी लगती है,ये कार्तिक की भोर lलगता है ओढे आई एक चादर,मन लगता नाचे जैसे मोर l
मेरा दिल ...तो तुम्हारे शहर के नाम से ही धड़कने लगता है।
एक आवाज़, दिल को राहत दे गई,जल्दी बीते ये दिन चाहत दे गई l
कभी गुस्से में मुझे वो बहुत डाँटती है,ऐसा प्यार वो सबको नहीं बाँटती है l
उसके होके हम,उससे जुदा हो जायेंगे,यूँ हम एक दिन मोह्हबत से,खफा हो जायेंगे l