बचपन में मेहमान घर आते थे
तो लगता था कि...
कब खा-पीकर जेब में हाथ डाले
और बोले..
अरे बेटा जरा इधर आना तो..!!
गर्मी के दोहे...
पंखा देखत रात गई
आई ना लेकिन light ,
मच्छर गाते रहे कान में
Party All Night ..!!
काबिल नहीं दलित बनो
कामयाबी झक मार कर आएगी..!!
घमंड और पेट
जब ये दोनों बढ़ते है तो
इंसान चाहकर भी किसी
को गले नहीं लगा पता...