दिल का खेल था,
तुम दिल से ही खेल गए!
दिल का क्या है कहीं भी लग जाता है,
तबाह तो तब होता है जब कहीं ठहर जाता है!
कौन कहता है कि दिल सिर्फ सीने में होता है,
तुझको लिखूँ तो मेरी उंगलियाँ भी धड़कती है।
तुम चाहे बंद कर लो दिल के दरवाजे सारे,
हम दिल मे उतर आएंगे कलम के सहारे !
छुपी होती है लफ्जों में बातें दिल की,
लोग शायरी समझ के बस मुस्कुरा देते हैं !