बारिश के मौसम में तेरी यादें सब कुछ
भुला देती हैं फिर भी मेरी आँखों
से बहते हुए आँसू नहीं रुकते…
तेरे प्रेम की बारिश हो,
मैं जलमगन हो जाऊं,
तुम घटा बन चली आओ,
मैं बादल बन जाऊं !
मौसम-ए-इश्क़ है तू एक कहानी बन के आ,
मेरे रूह को भिगो दें जो तू वो पानी बन के आ !
कहीं फिसल ही न जाऊँ तेरी याद में चलते-चलते !
रोक अपनी यादों को मेरे शहर में बारिश का समाँ है !!
कच्ची मिट्टी का बना होता है उम्मीदों का घर
ढह जाता है हकीकत की बारिश में अक्सर !!
जब भी होगी पहली बारिश तुमको सामने पाएँगे
वो बूंदों से भरा चेहरा तुम्हारा हम देख तो पाएँगे