तमिज में रहो वरना
बत्तमीज तो हम भी है..!!
पहचान तो सबसे है हमारी,
लेकिन भरोसा सिर्फ खुद पर है !!
हम तो पत्थर हैं हमको पिघलना नहीं आता,
मौसम कि तरह पल में बदलना नहीं आता।
वाकिफ़ तो रावण भी था अपने अंजाम से,
मगर ज़िद्द थी उसकी अपने अंदाज़ में जीने की..!!
सुधरी हे तो बस मेरी आदते वरना मेरे शौक,
वो तो आज भी तेरी औकात से ऊँचे हैं..!!
सुन बेटा तू सिगरेट है ,
तो में धुआं हूं,
तू पैरो से कुचला जायेगा और
में धुआं की तरह आसमान में फ़ैल जाऊंगा।