जी चाहे कि दुनिया की हर एक फ़िक्र भुला कर,दिल की बातें सुनाऊं तुझे मैं पास बिठाकर।
कौन सी लत ये मुझे सोचने की लग गई हैफ़ैसले कितने हुआ करते थे आसान मेरे
थोड़ा संभल कर चलते है,थोड़ा लापरवाह हो जाते है,डरते थे जिस राह, जाने में,उसी सफ़र में खो जाते है l
"तेरी चार बातें, मुस्कुरा के सुन लेता हूँ,तुमसे हार कर, तुमको जीत लेता हूँ l"
“हर वक्त मुस्कुराना फितरत हैं हमारी,
आप यूँ ही खुश रहे हसरत हैं हमारी,
आपको हम याद आये या ना आये,
आपको याद करना आदत हैं हमारी.”
उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से
तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिए बनाया है