क्या बताऊं तुझपर कितना भरोसा जताया था,
शादी करूंगा तुझ्से ये मैने मां को बताया था.
अपनी रातें उनके लिए ख़राब करना छोड़ दो दोस्तों,जिनको ये भी परवाह नहीं की तुम सुबह उठोगे भी या नहीं।
दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे,यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे,वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का,और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे..
तुझे चाहा रब से भी ज्यादा फिर भी ना तुझे पा सकेरहे तेरे दिल में मगर तेरी धडकन तक ना जा सकेजुड़के भी तुटी रहि ईश्क कि डोर वेकिस्मत के मारे असी कि करीये किस्मत पे किसका जोर
कौन याद रखता हैं गुजरे हुए वक़्त के साथी कोलोग तो दो दिन में नाम तक भुला देते हैं |