जब किस्मत में
नहीं पापा की परी,
तो फिर किस बात की
14 फ़रवरी !!
न चांद होगा ना तारे होंगे,क्या हम इस साल भी कुंवारे होंगे ,इस दुनिया में कितनों के निकाह हो गए ,क्या हमारे नसीब में सिर्फ निकाह के छुहारे होंगे।
काश प्यार का इन्शुरन्स हो जाता,
प्यार करने से पहले प्रीमियम भरवाया जाता.
प्यार में वफ़ा मिली तो ठीक वर्ना,
बेवफाओं पे जो खर्चा होता उसका क्लेम तो मिल जाता।
देखकर मेरी आँखें एक फकीर कहने लगा,
पलकें तुम्हारी नाज़ुक है,
खवाबों का वज़न कम कीजिये...!
ऐसी अपनी वाईफ हो,
जींस जिसकी टाईट हो,
चेहरा जिसका व्हाईट हो,
बालों में स्टाईल हो,
होंठों पर स्माइल हो,
इंडिया कि पैदाईश हो,
सास की सेवा जिसकी ख्वाहिश हो,
तो क्या हसीन लाईफ हो।