राह भी तुम हो राहत भी तुम ही हो,
मेरे सुख और दुख को बांटने वाली,
हमसफर भी तुम ही हो !
आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा
आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
कश्ती के मुसाफ़िर ने समुंदर नहीं देखा
गगन से भी ऊंचा मेरा प्यार हैतुझी पर मिटूंगा ये इकरार हैतू इतना समझ ले मेरे हमसफ़रतेरे प्यार से मेरा संसार है
राह भी तुम हो राहत भी तुम ही हो,मेरे सुख और दुख को बांटने वाली हमसफर भी तुम ही हो.