दिल की हसरत मेरी जुबान पे आने लगी ,
तुमने देखा और ये ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी,
ये इश़्क की इन्तहा थी या दीवानगी मेरी,
हर सूरत में मुझे सूरत तेरी नज़र आने लगी..!!
Tu hasi chand kisi aur ka sahi
Par tu mere andhere ki roshni he…
ज़ुल्म इतना ना कर के लोग कहे तुझे दुश्मन मेरा…!!
हमने ज़माने को तुझे अपनी “ जान ” बता रक्खा है…!!
Aa Bichadne Ka Koi Aur Tareeqa DhoodhenPyyar Badhta Hai Meri Jaaan Khafa Rahne Se
पता है तुम्हारी और हमारी
मुस्कान में फ़र्क क्या है?
तुम खुश हो कर मुस्कुराते हो,
हम तुम्हे खुश देख के मुस्कुराते हैं…