थोड़े गुस्से वाले थोड़े नादान हो तुम ,
मगर जैसे भी हो मेरी जान हो तुम।
तेरी मोहब्बत को तो पलकों पर सजायेंगे;
मर कर भी हर रस्म हम निभायेंगे;
देने को तो कुछ भी नहीं है मेरे पास;
मगर तेरी ख़ुशी मांगने हम खुदा तक भी जायेंगे।
मैं तमाम दिन का थका हुआ,
तू तमाम शब का जगा हुआ,
ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर,
तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ।
क्यूट तो मे बचपन से ही हू..
जब पैदा हुआ तब मम्मी को तो क्या,
नसॅ को भी मजबूर कर दिया था चुम्मी लेने को..!!
Is qadarr tora hai mujhe uss ke bewafayi ne "ghalib"
Ab koi agar pyar se bhi dekhahai to bikhar jata hoon main.