गुज़र रहा हू यहाँ से भी गुज़र जाउँगा..
मै वक़्त हू कहीं ठहरा तो मर जाउँगा !!!
इश्क का होना भी लाजमी है शायरी के लिये..कलम लिखती तो दफ्तर का बाबू भी ग़ालिब होता।
उसने मिलने की अजीब शर्त रखी… गालिब चल के आओ सूखे पत्तों पे लेकिन कोई आहट न हो!
खैरात में मिली ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती ग़ालिब,मैं अपने दुखों में रहता हु नवावो की तरह...
Dard ho Dil Men To Dawa KijiyeDil hi Jab Dard Ho To Kya Kijiye.