चंदन की लकड़ी फूलों का हार,अगस्त का महीना सावन की फुहार,भैया की कलाई बहन का प्यार,मुबारक हो आपको रक्षा-बंधनका त्यौहार।
आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
कश्ती के मुसाफ़िर ने समुंदर नहीं देखा
आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा
Dil Ki Dhadkno Ko Ek Lamha Sabar Nahi,
Shayad Ki Usko Ab Meri Kadar Nahi ,
Har Safar Mein Mera Kabhi Humsafar Tha Wo,
Ab Safar To Hai Magar Wo Humsafar Nahi.