जो इस दिल मे उतर गया वही बस सच है,
बाकि तो सब कशमकश है।
तलाश मेरी थी और भटक रहा था वो,
दिल मेरा था और धड़क रहा था वो,प्यार का तालुक भी अजीब होता है,आंसू मेरे थे सिसक रहा था वो..
सोचा था तुझपे प्यार लुटाकर तेरे दिल में घर बनायेंगे…..हमे क्या पता था दिल देकर भी हम बेघर रह जाएँगे.…..
कभी-कभी यूं ही चले आया करो दिल की दहलीज पर,,,,अच्छा लगता है, यूँ तन्हाइयों में तुम्हारा दस्तक देना...!!!
नहीं ‘मालूम ‘हसरत है या तू मेरी मोहब्बत है,बस इतना जानता हूं कि मुझको तेरी जरूरत है।