उसने मुहब्बत की मुझसे ….. और …निक़ाह में किसी और को क़ुबूल किया…!
अगर आए तुम्हे हिचकियाँ,तो माफ़ करना मुझे,क्योंकि इस दिल को आदत है,तुम्हे याद करने की…
अगर आए तुम्हे हिचकियाँ,
तो माफ़ करना मुझे,
क्योंकि इस दिल को आदत है,
तुम्हे याद करने की…
पूछते हैं मुझसे की शायरी लिखते हो क्यों,
लगता है जैसे आईना देखा नहीं कभी।
कितनी जल्दी ये शाम आ गई;
गुड नाईट कहने की बात याद आ गई;
हम तो बैठे थे सितारों की महफ़िल में;
चाँद को देखा तो आपकी याद आ गई.
मेरी यादों में तुम हो या मुझ में ही तुम हो,
मेरे ख़यालों में तुम हो या ख़याल ही तुम हो,
दिल मेरा धड़क के बार बार ये पूछे,
मेरी जान में तुम हो या मेरी जान ही तुम हो!!