आसमान भी बरसा नहीं अबकी सावन में,मेरी आँखें बरसती रही दिल के आँगन में.
ख्यालो में वही, सपनो में वहीलेकिन उनकी यादो में हम थे ही नहींहम जागते रहे दुनिया सोती रही,एक बारिश ही थी, जो हमारे साथ रोती रही..
तुम्हें पहली बारिश पसंद है और मुझे तुमतुम्हें हँसना पसंद है मुझे हँसते हुए तुम,तुम्हें हमसे बात करना पसंद है, मुझे बोलते हुए तुमतुम्हें सब कुछ पसंद हैं और मुझे बस तुम...
Barsat Ki Bheegi Raaton Mein Phir Koi Suhaani Yaad Aayi,Kuchh Apna Zamaana Yaad Aaya Kuchh Unki Jawaani Yaad Aayi,Hum Bhool Chuke They Jisne Hamein Duniya Mein Akela Chhor Diya,Jab Ghaur Kiya To Ek Soorat Jaani Pehchaani Yaad Aayi
मज़ा बरसात का चाहो तो इन आँखों में ना बैठोवो बरसो में कभी बरसे, यह बरसो से बरसती है|