चलो ख़ामोशियों की गिरफ़्त में चलते है…बातें ज़्यादा हुई तो जज़्बात खुल जायेंगे
चलो ख़ामोशियों की गिरफ़्त में चलते है…
बातें ज़्यादा हुई तो जज़्बात खुल जायेंगे
बातो बातो मैं दिल ले जाते हो,देखते हो इस तरह जान ले जाते हो,अदाओ से अपनी इस दिल को धरकाते हो,लेकर बाहों मै – सारा जहाँ भुलाते हो.
तेरे पास में बैठना भी इबादत
तुझे दूर से देखना भी इबादत …….
न माला, न मंतर, न पूजा, न सजदा
तुझे हर घड़ी सोचना भी इबादत….
गुज़रते लम्हों में सदिया तलाश करता हूँ,
ये मेरी प्यास है नदिया तलाश करता हूँ.
यहाँ तो लोग गिनाते है खुबिया अपनी,
में अपने आप में खामिया तलाश करता हूँ….!!
बुरे वक़्त में भी एक अच्छाई होती है…
जैसे ही ये आता है.फ़ालतू के दोस्त विदा हो जाते हैं…!!!