अपना और पराया क्या है,मुझे तो बस यही पता है,जो भावनाओं को समझे वो अपना,और जो भावना से परे हो वो पराया,जो दूर रहकर भी पास हो वो अपना,और जो पास रहकर भी दूर हो वो पराया।
अपना और पराया क्या है,
मुझे तो बस यही पता है,
जो भावनाओं को समझे वो अपना,
और जो भावना से परे हो वो पराया,
जो दूर रहकर भी पास हो वो अपना,
और जो पास रहकर भी दूर हो वो पराया।
विद्या के अलंकार से अलंकृत होने पर भी दुर्जन से दूर ही रहना चाहिए,
क्योंकि मणि से भूषित होने पर भी क्या सर्प भयंकर नहीं होता
सपने तो मेरे थे पर उनको पूरा करने का रास्ताकोई और दिखाए जा रहा था और वो थे मेरे पापा….
सपने तो मेरे थे पर उनको पूरा करने का रास्ता
कोई और दिखाए जा रहा था और वो थे मेरे पापा….
ज़िन्दगी के हाथ नहीं होते..
लेकिन कभी कभी वो ऐसा थप्पड़ मारती हैं जो पूरी उम्र याद रहता हैं.
यदि आप डर पर विजय पाना चाहते हैं तो घर बैठे उसके बारे में सोचिये मत. बाहर निकालिए और अपने काम मे व्यस्त हो जाइये।