अपना और पराया क्या है,मुझे तो बस यही पता है,जो भावनाओं को समझे वो अपना,और जो भावना से परे हो वो पराया,जो दूर रहकर भी पास हो वो अपना,और जो पास रहकर भी दूर हो वो पराया।
अपना और पराया क्या है,
मुझे तो बस यही पता है,
जो भावनाओं को समझे वो अपना,
और जो भावना से परे हो वो पराया,
जो दूर रहकर भी पास हो वो अपना,
और जो पास रहकर भी दूर हो वो पराया।
परिश्रम की मिशाल हैं, जिस पर कर्जो के निशान हैं,
घर चलाने में खुद को मिटा दिया, और कोई नही वह किसान हैं
आज भी मेरी फरमाइशें कम नही होती,
तंगी के आलम में भी, पापा की आँखें कभी नम नहीं होती.
यकीन और दुआ नज़र नहीं आते मगर,
नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं।
सपने तो मेरे थे पर उनको पूरा करने का रास्ता
कोई और दिखाए जा रहा था और वो थे मेरे पापा….