अपना और पराया क्या है,मुझे तो बस यही पता है,जो भावनाओं को समझे वो अपना,और जो भावना से परे हो वो पराया,जो दूर रहकर भी पास हो वो अपना,और जो पास रहकर भी दूर हो वो पराया।
अपना और पराया क्या है,
मुझे तो बस यही पता है,
जो भावनाओं को समझे वो अपना,
और जो भावना से परे हो वो पराया,
जो दूर रहकर भी पास हो वो अपना,
और जो पास रहकर भी दूर हो वो पराया।
विद्या के अलंकार से अलंकृत होने पर भी दुर्जन से दूर ही रहना चाहिए,
क्योंकि मणि से भूषित होने पर भी क्या सर्प भयंकर नहीं होता
अच्छाई और बुराई दोनों हमारे अंदर हैं
जिसका अधिक प्रयोग करोगे वो उभरती व निखरती जायगी
अगर आप नेक इंसान हो और लोग आपको बुरा कहे तो चलेगा,
क्यूँकि यह इससे कही अच्छा है कि तुम बुरे हो और लोग तुम्हें अच्छा कहे.
Suruaat Se Dekhne Ki Aadat He Hume..Chahe Vo Film Ho Ya Dushman Ki Barbadi..