“वो तो अच्छा हुआ मुझे फर्क पड़ना बंद हो गया,वरना बेचारा बद्दुआओं का सबक लेते लेते थक जाता…”
“वो तो अच्छा हुआ मुझे फर्क पड़ना बंद हो गया,
वरना बेचारा बद्दुआओं का सबक लेते लेते थक जाता…”
अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है…
“अहंकार” दूसरों को झुकाकर कर खुश होता है,
“संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!
अगर आप नेक इंसान हो और लोग आपको बुरा कहे तो चलेगा,
क्यूँकि यह इससे कही अच्छा है कि तुम बुरे हो और लोग तुम्हें अच्छा कहे.
Kitnaa khouf hota hai shaam ke andheroo mein,
Poonch un parindoo se jin ke ghar nahi hote.
परिश्रम की मिशाल हैं, जिस पर कर्जो के निशान हैं,
घर चलाने में खुद को मिटा दिया, और कोई नही वह किसान हैं