तुम्हारा तुम कहकर रोज़ झगड़ना मुझसे,तुम्हारा आप कहकर बिछड़ने से अच्छा था.
तुम्हारा तुम कहकर रोज़ झगड़ना मुझसे,
तुम्हारा आप कहकर बिछड़ने से अच्छा था.
तेरे गम को अपनी रूह में उतार लूँ,जिन्दगी तेरी चाहत में सवार लूँ,मुलाकात हो तुझ से कुछ इस तरह,तमाम उमर बस इक मुलाकात में गुजार लूँ।
तोड़ा कुछ इस अदा से तालुक़ उस ने ग़ालिब,कि सारी उम्र हम अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे।
तबाह होकर भी तबाही दिखती नही,ये इश्क़ है इसकी दवा कहीं बिकती नहीं।
Dil Ki Dahleez Par Rakh Kar Teri Yaadon Ke ChiraagHumne Duniyan Ko Mohabbat Ke Ujaale Bakhshey