दस्तक और आवाज तो कानों के लिए है…
जो रुह को सुनाई दे उसे खामोशी कहते हैं!
हम तस्लीम करते हैं,
हमें फुर्सत नहीं मिलती,
मगर ये भी ज़रा सोचो,
तुम्हें जब याद करते हैं,
ज़माना भूल जाते हैं|
आखों में कोई आंसू नहीं.
दिल में कोई डर नहीं.
ना आंसू ना डर.
मेरे प्यारे दोस्त,
आपको मेरे दिल से हैप्पी न्यू ईयर
गुज़र जायेगी ज़िन्दगी उसके बगैर भी,
वो हसरत-ए-ज़िन्दगी है ….
शर्त-ए-ज़िन्दगी तो नहीं……!!
कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,
कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,
बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,
आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी