ज़िंदगी खेल हैं शतरंज का,
तुम्हें कब, कौन और कहाँ मात दे दे क्या पता !
कोई वादा ना कर, कोई ईरादा ना कर!
ख्वाईशो मे खुद को आधा ना कर!
ये देगी उतना ही, जितना लिख दिया खुदा ने!
इस तकदीर से उम्मीद ज़्यादा ना कर!
जिनका कद ऊँचा होता है
वो दूसरों से झुक कर ही बात करते हैं
इंसान हर घर में जन्म लेता है
लेकिन इंसानियत कहीं कहीं ही जन्म लेती है
ज़िन्दगी दो दिन की है,
एक दिन आपके हक़ में, एक दिन आपके खिलाफ,
जिस दिन हक में हो गुरुर मत करना,
और जिस दिन खिलाफ हो, थोडा सा सब्र ज़रूर करना।