"चाँद चढ़ता है,आसमां में,वो आँखों में उतर आता है,कैसा शख्स है वो,सपनों में भी आ जाता है l"
शुभ रात्रि
रोज़ इक ताज़ा शेऱ कहां तक लिखूं तेरे लिए,
तुझमें तो रोज़ ही एक नयी बात हुआ करती है…
उम्र ने तलाशी ली, तो जेबों से लम्हे बरामद हुए..कुछ ग़म के, कुछ नम थे, कुछ टूटे, कुछ सही सलामत थे..
उसके इकरार का इंतजार है मुझे
जाने क्यूँ उससे इतना प्यार है मुझे
ऐ खुदा कब आएगा वो हसीन पल
जब वो खुद कहेगी जान तुमसे प्यार है मुझे
Aansu na hote to aankh itni haseen na hoti,
Dard na hota to khushiyo kya hoti,
Puri karte khuda yuhi sab muraade,
To ibadat ki kabhi zarurat na hoti.