दुश्मनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी,
मैं हाथ नहीं उठाता बस नज़रों से गिरा देता हूँ।
याद आयेगी हमारी तो बीते कल को पलट लेना ..
यूँ ही किसी पन्ने में मुस्कुराते हुए मिल जायेंगे ..
ऐ सूरज, मेरे अपनों को पैगाम देना
खुशियों का दिन, हंसी की शाम देना
जब देखें प्यार से मेरे sms को तो
उनके चेहरे पे प्यारी सी मुस्कान देना
शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है
बिन बात के ही रूठने की आदत है,
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है,आप खुश रहें, मेरा क्या है..मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।