जिसकी याद में सारे जहाँ को भूल गए,
सुना है आजकल वो हमारा नाम तक भूल गए,
कसम खाई थी जिसने साथ निभाने की यारो,
आज वो हमारी लाश पर आना भूल गए।
Hasai to hasi lav,
Radai to radi lav,
Sangraam chhe jindagi,
Ladai to ladi lav.
जिन फूलों को संवारा था
हमने अपनी मोहब्बत से,
हुए खुशबू के काबिल तो
बस गैरों के लिए महके।
रस्मे उल्फत को निभाए तो निभाए कैसे,हरतरफ आग है ,दामन को बचाए कैसे।बोझ होता जो गमों का तो उठा भी लेते,जिंदगी बोझ बनी तो फिर उठाए कैसे।
तनहाई ले जाती है जहाँ तक याद तुम्हारी,
वही से शुरू होती है जिंदगी हमारी,
नहीं सोचा था हम चाहेंगे तुम्हें इस कदर,
पर अब तो बन गए हो तुम किसमत हमारी...