ये वक़्त बेवक़्त मेरे ख्यालों
में आने की आदत छोड़ दो तुम,
कसूर तुम्हारा होता है और
लोग मुझे आवारा समझते हैं
तेरे बाद हमने इस
दिल का दरवाजा खोला ही नहीं
वरना बहुत से चाँद आये
इस घर को सजाने के लिए
बीत गया जो साल,भूल जायें … इस नये साल को गले लगाये, करते है दुआ हम रब से सर झुका के … इस साल का सारे सपने पूरे हो आपके “नया साल मुबारक”
Humne to khud se inteqam lia ,
Tumne kya soch kar humse mohabbat ki?