हमें चिंता नहीं उनकी, उन्हें चिंता हमारी हैं,
हमारे प्राण के रक्षक सुर्दशन चक्रधारी हैं |
खन खना खन है ख्यालों मेंजरुर आज उसने कंगन पहने होंगे
तुझको खुदा ने रुक-रुक बनाया,
पूरी ज़माने की खुदाई तुझ में ही भर दी,
हर अंग तेरा जैसे ,
रह-रह तू बरसे सावन महीना…
मेरे दोस्तों ने इकट्ठा किया मेरे ही कत्ल का सामान,
मैंने उनसे कहा,
यारो तुम्हारी नफरत ही काफी थी मुझे मारने के लिए……
ज़िदगी जीने के लिये मिली थी,
लोगों ने सोच कर गुज़ार दी……