पहले हर अच्छी बात का मज़ाक बनता है, फिर उसका विरोध होता है, और फिर उसे स्वीकार कर लिया जाता है।
ज़रूरी नहीं की हर समय, लबों में भगवन का नाम आये,
वो लमहा भी भक्ति का होता है, जब इंसान इंसान के काम आये।
विद्या के अलंकार से अलंकृत होने पर भी दुर्जन से दूर ही रहना चाहिए,
क्योंकि मणि से भूषित होने पर भी क्या सर्प भयंकर नहीं होता
ज़िन्दगी के हाथ नहीं होते..
लेकिन कभी कभी वो ऐसा थप्पड़ मारती हैं जो पूरी उम्र याद रहता हैं.
ईश्वर कहते हैं उदास न हो,
मैं तेरे साथ हूँ, सामने नहीं आस पास हूँ,
पलकों को बंद कर और दिल से यादकर,
में कोई और नहीं, तेरा विश्वास हूँ।