हर-हर हो महादेव शिव का,
हर पल नाम तुम्हारा जपे,
नाग-पंचमी का आया त्योहार,
शिव को करते हम नमन बारम्बार,
शिव बाबा करें बेड़ा पार |
कितने मूर्ख हैं
हम भगवान के बनाए फलों को भगवान को ही अर्पण करके धन दौलत माँगने लगते हैं
धागा एक बार टूट जाये तो फिर से जोड़ने पर भी गाँठ पड़ ही जाती है
उसी तरह रिश्ते एक बार टूट जाये तो फिर से जोड़ने में एक गाँठ बन ही जाती है
ये सिलसिला क्या यूँ ही चलता रहेगा,
सियासत अपनी चालों से कब तक किसान को छलता रहेगा.
परिश्रम वह चाबी है
जो सौभाग्य के द्वार खोलती है